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Secondary / Higher Secondary

 

Mr. Arjunsingh Parmar

(Principal- Sec./H.Sec. Hindi Medium)

 

:: आदरणीय अभिभावकगण स्नेहीजनों विधार्थियो ::

'मोती का निर्माण ज्यों, करता कोई सीप।

जीवन - मुक्ता गढ़ रहा, विधा का ये दिप'

 

सन १९६३ में स्थापित, भटार चार रस्ता, सूरत में स्थित विधाभारती हिन्दी विधालय दक्षिण गुजरात में शिक्षा के क्षेत्र में अद्रितीय स्थान बनाए हुए हे।  यह विधालय भौतिक साधन सामग्री व् शैक्षणिक साधनो से सुसज्जित होकर न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अपनी धवल पताका फहराई है बल्कि जीवन के विविध क्षेत्रो जैसे खेल, संगीत, कला, साहित्य, विज्ञान में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करके विधार्थीयो को नैतिकता, कर्मठता और जीवन मूल्यों का उपयोगी पाठ भी पढ़ाया है।  विधार्थीयो के जीवन में इसकी भूमिका एक ऐसे आलोक स्तंभ की रही है जो न सिर्फ अपने निर्मल प्रकाश के आभामंडल में विधार्थीयो को घेर लेता है, उनका मार्गदर्शक बनकर जीवन - पथ आलोकित करता रहता है।

 इस विधालय में अनेकता में एकता के दर्शन होते है एवं अखंड भारत की झलक दिखाई देती है।  विधालय राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार - प्रसार तथा विविध राज्यो से नोकरी, व्यवसाय के लिए शहर में आए मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चो को श्रेष्ट व् सानुकूल शिक्षा प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था।  इस विधालय से शिक्षा प्राप्त कर अनेक विधार्थी आज चिकित्सा, प्रशासनिक सेवा, अभियांत्रिकी, वकालत, संगणकीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होकर प्रशसनिय सेवाए दे रहे है।   विधालय में सेवारत शिक्षक भाई बहन तथा शिक्षणेतर कर्मचारीगण निष्ठापूर्वक सेवा भावना से कर्तव्यपालन करते हुए अन्य  विधालय के लिए प्रेरणास्त्रोत साबित हो रहे है, तथा अपने स्वर्णिम स्वप्न को साकार कर रहे है।  आज हमारे  विधालय की सफलता और श्रेष्ठ शिक्षण की खुशबु सिर्फ गुजरात में ही नहीं बल्कि देश के कोने कोने में फैलती हुई, विदेशो तक जा रही है।  हमारे  विधालय के सर्वागीण प्रगति व् विकासयात्रा में विधाभारती ट्रस्ट के सभी सदस्यों की दूरदर्शिता व् त्याग का अहम योगदान रहा हें।

 

करत-करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान

रसरी आवत जात ते, सिल पर हॉत निशान

 

धन्यवाद।